देश का एक ऐसा गांव, जहां नही करता कोई धूम्रपान

लखनऊः देश हो या विदेश ऐसी कोई जगह नहीं बची होगी, जहां लोग धूम्रपान न करते हो। आज के समय में हर सातवां शख्स धूम्रपान करते दिख जाएगा लेकिन आज हम आपको जिस गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे कभी नशे की लत लगी ही नहीं। आपको सुनकर अजीब लग रहा होगा लेकिन ये बात सही हैं। इस गांव में कोई भी धूम्रपान नहीं करता, बुजुर्ग हो या जवान हर कोई बीड़ी-सिगरेट, पान-मसाला से दूर रहता है। 

हरियाणा के अंतिम छोर पर बसा राजस्थान से सटा छोटा सा गांव टीकला। यहां की आबादी मात्र 1500 है। गांव भले ही छोटा सा हो लेकिन यहां दशकों से चली आ रही एक परंपरा इसे ऐतिहासिक बनाते हुए बड़ा संदेश दे रही है। गांव में कोई भी धूम्रपान नहीं करता, बुजुर्ग हो या जवान हर कोई बीड़ी-सिगरेट, पान-मसाला से दूर रहता है। 


यही नहीं अगर गांव में कोई रिश्तेदार आता है तो उसे भी पहले बीड़ी-सिगरेट का सेवन न करने को कह दिया जाता है। अगर कोई अंजान व्यक्ति गांव में प्रवेश करता है तो गांव वालों का पहला सवाल यही होता है- जेब में बीड़ी-सिगरेट, पान-गुटखा तो नहीं है, इसके बाद ही उससे आगे बात की जाती है। 

गांव की पहचान हरियाणा ही नहीं बल्कि राजस्थान के कई गांव भी इसे आदर्श मानते हैं। गांव टीकला में तंबाकू का किसी रूप में सेवन न करने की यह परंपरा आज की नहीं बल्कि कई दशकों से है। दिल्ली से जयपुर तक इस गांव को इसलिए ही पहचाना जाता है कि यहां कोई तंबाकू का उपयोग नहीं करता।


गांव टीकला में बाबा भगवानदास का मंदिर और समाधि बनी हुई है। उनकी 23वीं पीढ़ी में गृहस्थ गद्दी संभाल रहे बाबा अमर सिंह बताते हैं कि बाबा भगवानदास ने तंबाकू का बहिष्कार करने की शुरुआत की थी। बाबा के कई चमत्कार के बाद लोगों की आस्था उनमें बढ़ती गई और लोगों ने किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करना छोड़ दिया। तब से शुरू हुई आस्था आज गांव में जागरूकता के रूप में बदल चुकी है। गांव के लोग ही नहीं अन्य कई गांवों के लोगों की भी यहां के बाबा पर आस्था है। अब अन्य गांवों को भी तंबाकू का उपयोग न करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।