16 महीने पहले हुआ था अंतिम संस्कार अचानक घर लौटा शख्स, बताई ऐसी बात कि...

नई दिल्लीः दुनिया कितनी भी तरक्की कर ले। लेकिन जब तक पूरी तरह से लोग शिक्षित नहीं होंगे तब तक अंधविश्वास को खत्म नहीं किया जा सकता।   कई बार जो बीमारी हमारे समझ में नहीं आती हम उसे देव, भूत, प्रेत और पिशाच का प्रकोप का मान बैठते हैं।

आज भी अपने देश भारत में ऐसे कई गांव हैं जहां सांप के काटने पर अस्पताल भागने की जगह ओझा, तांत्रिक या सपेरे के पास भागते हैं। ऐसे में कई बार पीड़ित शख्स की मौत भी हो जाती है। आज हम आपको एक ऐसी खबर बताएंगे जिससे आप लोगों को सीख मिलेगी कि ओझा या तांत्रिक के बजाए डॉक्टरों पर भरोसा करना ठीक है।

इस बात का उदाहरण यह परिवार जिसने बिना सोचे समझे अपने घर के ज़िंदा बेटे को नदी में मरा समझकर प्रवाहित कर दिया। 23 अगस्त 2017 को योगेश कुमार को सांप ने डस लिया था। योगेश को अस्पताल ले जाने के बजाय उसके परिवार वाले उसका ज़हर उतारने के लिए सपेरे के पास ले गए। जहां उसने उसका इलाज इसलिए करने से इंकार कर दिया कि वह उसका इलाज नहीं कर सकता। इसके बाद योगेश के परिजन ने घाट पर ले जाकर उसे गंगा में प्रवाहित कर दिया। योगेश के जाने का शोक घर में काफी दिनों तक पसरा हुआ था।

इसके बाद धीरे-धीरे ज़िंदगी पटरी पर आ गई थी लेकिन बीते दिन जब उनके घर के दरवाज़े पर योगेश ने दस्तक दी तो सभी हैरान रह गए। पहले तो परिजनों को भी विश्वास नहीं हुआ। लेकिन उसके बाद परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। योगेश का कहना है कि उसकी जान कुछ सपेरों ने बचाई थी। अब योगेश की कहानी जो भी हो कभी किसी को खुद दे किसी रोग का इलाज नहीं करना चाहिए।