मिर्च के हवन से प्रसन्न होती हैं ये देवी, मेघनाथ वध से है इसका संबंध !

नई दिल्लीः हमारे भारत देश में देवी-देवताओं के बहुत से ऐसे मंदिर हैं जिनमें लोगों ने चमत्कार होते देखा है। देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए लोग तरह-तरह के पूजा-हवन करते हैं। घरों में लोग हवन कराते हैं ताकि उनके घर में सुख शांति बनी रहे। लेकिन यदि वो हवन आम की लकड़ी,घी कपूर आदि का न होकर लाल मिर्च का हो तो क्या होगा। 

किभी जलती आग या हवन में यदि लाल मिर्च डाल दी जाए तो शायद ही वहां कोई रुक पाएगा। सभी वहां से भाग जाएंगे।  लेकिन एक ऐसा भी मंदिर है जहां की देवी मां लाल मिर्च के हवन से प्रसन्न होती हैं। आपके ये जानकर हैरानी हो रही होगी लेकिन कुछ दिन पहले जो कर्नाटक में हुआ वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। कर्नाटक के तीक्ष्ण प्रत्यंगिरा देवी मंदिर में अमावस्या की रात सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच एक ऐसा हवन किया गया जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते।

इस हवन में दस क्विंटल सूखी लाल मिर्च झोंकी गई और साथ ही साथ तरह-तरह की सब्ज़ियों और मिठाइयों का भी हवन किया गया। खास बात यह है कि इस हवन को करने के पीछे का कारण सिनेमा और कारोबारियों के बिजनेस को बढ़ाने था। इस हवन में शामिल हुए गुरुजी अघोर किशोर गणपति राट ने बताया कि हवन करने वाले श्रद्धालुओं की आयु लंबी होगी। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस हवन के शुरू होने से पहले यहां मौजूद लोग डर रहे थे कि लोगों को मिर्च के धुएं से तकलीफ होगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

तीक्ष्ण प्रत्यंगिरा देवी को नरसिम्ही या नरसिंहिका भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में इन्हें शक्ति का रूप माना जाता है। वह विष्णु, शिव और शक्ति की संयुक्त विनाशकारी शक्ति रखती है। उनका शेर और मानव रूपों का यह संयोजन अच्छाई और बुराई के संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। कहा जाता है कि देवी प्रत्यंगिरा की सच्चे मन से साधना, आराधना, जप करने से यश, वैभव, कीर्ति प्राप्त की जा सकती है।

भद्रकाली के नाम से भी पूजी जाने वाली प्रत्यंगिरा देवी का वर्णन रामायण में भी किया गया है। रामायण में जब भगवान राम युद्ध कर रहे थे तब मेघनाद प्रत्यंगिरा देवी का अनुष्ठान कर रह था। हनुमान जी को पता चल गया और वे तुरंत अनुष्ठान को रोकने के लिए गए उन्हें पता था कि अगर मेघनाथ का अनुष्ठान सफल हो गया तो वह अजेय हो जाएगा।