दुनिया में खास है भारत के इस राज्य का रसीला आम

नई दिल्लीः यूं तो राजस्थान का दक्षिणांचल बांसवाड़ा अपने प्राचीन शिल्प-स्थापत्य और वनबंधुओं की अनूठी परंपराओं के चिरंतन काल से जाना-पहचाना जाता है, लेकिन गर्मी की ऋतु में आने वाले फलों के राजा आम की चर्चा हो तो बात कुछ खास हो जाती है। वागड़ की गंगा कही जाने वाली माही से सरसब्ज बांसवाड़ा जिला फलों के उत्पादन के लिए भी मुफीद है और यही वजह है कि यहां पर आम की कुल 46 प्रजातियों की हर साल बंपर पैदावार होती है। इन रसीले आमों की मिठास देशभर में पहुंचती है। इन दिनों इन सभी प्रजातियों के आम बाजार में भरपूर उपलब्ध हैं और वागड़वासी इसके अमृतमयी रस का लुत्फ उठा रहे हैं। यह बात अलग है कि इस बार कोरोना के संकट के कारण इनकी सप्लाई दूरस्थ शहरों तक नहीं हो पा रही है। 

देखा जाए तो बांसवाड़ा जिले में परंपरागत रूप से पैदा होने वाली देसी रसीले आम की 18 प्रजातियों के साथ देशभर में पाए जाने वाली उन्नत किस्म की 28 अन्य प्रजातियों का भी उत्पादन होता है। जिले में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा संचालित क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, बोरवट (बांसवाड़ा) पर भी बड़े क्षेत्र में मातृ वृक्ष बगीचे स्थापित हैं जहां देशी व उन्नत विभिन्न किस्म की कुल 46 प्रजातियों की आम किस्मों का संकलन है। यहां पर आम के ग्राफ्टेड पौधे तैयार कर किसानों को उपलब्ध करवाये जाते हैं। 

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के उपनिदेशक (उदयपुर) डॉ. कमलेश शर्मा बताते हैं कि बांसवाड़ा जिले के विभिन्न बगीचों में आम की किशन भोग, बोम्बे ग्रीन, बोम्बई, केसर, राजस्थान केसर, फजली, मूलागो, बैगनपाली, जम्बो केसर गुजरात, स्वर्ण रेखा, बंगलौरा, नीलम, चौसा, दशहरी, मनकुर्द, वनराज, हिमसागर, जरदालु, अल्फांजो, बजरंग, राजभोग, मल्लिका, लंगड़ा, आम्रपाली, फेरनाड़ी, तोतापूरी, रामकेला आदि 28 प्रजातियों का तो उत्पादन होता ही है, साथ ही देसी रसीले आम की 18 प्रजातियों यथा टीमुरवा, आंगनवाला, देवरी के पास वाला, कसलवाला, कुआवाला, आमड़ी, काकरवाला, लाडुआ, हाडली, अनूप, कनेरिया, पीपलवाला, धोलिया, बारामासी, बनेसरा, सागवा, कालिया, मकास आदि प्रजातियों का भी उत्पादन होता है। सबसे खास बात है कि आम की 18 स्थानीय प्रजातियां रेशेदार हैं और इनका उत्पादन सिर्फ दक्षिण राजस्थान में ही होता है।  

विभागीय आंकड़ों को देखें तो जिले के कुल फल उत्पादन क्षेत्र 3 हजार 480 हेक्टेयर में से 3 हजार 115 हेक्टेयर में आम का उत्पादन होता है जो कि कुल फलोत्पादन क्षेत्र का 90 प्रतिशत है। जिले में पैदा होने वाली आम की 46 से अधिक प्रजातियों की बंपर पैदावार व उपलब्धता के कारण जिला प्रशासन, कृषि अनुसंधान केन्द्र और पर्यटन उन्नयन समिति, बांसवाड़ा द्वारा पहल करते हुए गत वर्ष 7 से 9 जून, 2019 तक तीन दिवसीय ‘बांसवाड़ा मेंगो फेस्टिवल, 2019’ का आयोजन किया गया। यह मेंगो फेस्टिवल राजस्थान का पहला मेंगो फेस्टिवल था और इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य यहां पैदा होने वाले आम की स्थानीय और उन्नत किस्मों से जनसामान्य को रूबरू कराना, किसानों को आम बगीचे लगाने प्रेरित करना तथा उद्यमियों को आम प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना था।