आज भी शिव मंदिर में पूजा करने आता महाभारत का ये योद्धा !

नई दिल्ली: माना जाता  है कि महाभारत में आर्यवर्त के सारे महारथी, अतिरथी और महान योद्धाओं का वध किया गया था। महाभारत के युद्ध में भगवान श्री कृष्ण का सबसे अहम योगदान माना जाता है, लेकिन यह सत्य नहीं है भगवान श्री कृष्ण ने पंडवो की तरफ से कई बार शान्ति का प्रस्ताव कौरवों  को दिया था।

लेकिन कौरवों ने उनके इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए युद्ध करने की बात कही थी । इस युद्ध की समाप्ति के बाद धर्म की जीत हुई थी, भले ही यह युद्ध राज के लोभ में किया गया हो, लेकिन श्री कृष्ण को दोषी ठहराते हुए कौरवों की माता गांधारी ने उन्हें श्राप दिया गया कि उनका वंश आपसे में ही लड़कर मरेगा। इस तरह महाभारत में एक और महानयोद्धा थे जिन्हें श्री कृष्ण द्वारा श्राप दिया गया था।  

अगर आप महाभारत के बारे जानकारी रखते हैं तो आपने गुरु दोर्णाचार्य के पुत्र अश्वथामा को जानते ही होंगे उनके बारे में कई तरह की बातें सुनी होंगी जिनमें ये कहा जाता है कि वो आज भी धरती पर मौजूद हैं और उन्हें आज भी देखा जाता है।

आपको बता दें कि अश्वथामा को युगों-युगों तक धरती पर भटकने का श्राप मिला था जिसके बाद समय-समय पर लोग उन्हें देखने का दावा करते रहते हैं। कहा जाता है कि मध्यप्रदेश के एक शिव मंदिर में आज भी अश्वथामा आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं।

आपको बता दें कि अश्वथामा महाभारत काल के योद्धा थे और उन्हें कभी भी कोई नहीं हरा पाया लेकिन उनकी एक छोटी की भूल की वजह से एक श्राप मिला था जिसकी वजह से कहा जाता है कि वो आज भी धरती पर भटक रहे हैं।

अपने पिता द्रोणाचार्य की मृत्यु का बदला लेने निकले अश्वत्थामा को उनकी एक चूक भारी पड़ी और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें युगों-युगों तक भटकने का श्राप दे दिया। ऐसा कहा जाता है कि पिछले पांच हजार सालों से अश्वत्थामा की आत्मा भटक रही है।

ऐसा कहा जाता है कि मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में स्थित असीरगढ़ किले की शिवमंदिर में प्रतिदिन सबसे पहले पूजा करने आते है। शिवलिंग पर प्रतिदिन सुबह ताजा फूल एवं गुलाल चढ़ा मिलना अपने आप में एक रहस्य है।