मानव शरीर के महत्वपूर्ण अंग गुर्दे

विश्व किडनी दिवस 14 मार्च पर विशेष 

गुर्दे मानव शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। उनका प्रधान कार्य मूत्र उत्पादन (रक्त शोधन) करना है। इनके द्वारा रक्तचाप का नियामन, इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन, रक्त शोधन होता है। यह शरीर से अपशिष्ट को बाहर निकालते हैं (जिसे मूत्र के द्वारा बाहर निकल दिया जाता है)। मूत्र का उत्पादन करते समय गुर्दे यूरिया और अमोनिया जैसे अवशिष्ट पदार्थ उत्सर्जित करते हैं।

गुर्दे हार्मोन भी उत्पन्न करते हैं, जिनमें कैल्सिट्रिओल, रेनिन और एरिथ्रोपिटिन शामिल हैं। गुर्दे शरीर के महत्वपूर्ण अंग होने के कारण सदैव पूर्णतः सक्रिय रहते हैं। हर दिन बदल रही लाइफस्टाइल की वजह से, वक्त पर खाना नहीं खाने से, दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल से, सही मात्रा में पानी न लेने के कारण गुर्दो की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती हैं। ऐसे में इस पर अधिक भार पड़ता है और गुर्दों में खराबी आने लगती है। 



गुर्दों की बीमारी खतरनाक है। इसका शुरुआती अवस्था में पता नहीं चल पाता। धीरे-धीरे यह खराब होने लगते हैं। काफी समय बाद शरीर ऐसे संकेत देने लगता है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गुर्दे सही से काम नहीं कर रहे हैं। जीर्ण गुर्दा रोग, गुर्दों की बीमारियों में आम है। इसका यदि ठीक प्रकार से इलाज न किया जाए तो समस्या और खतरनाक हो सकती है।

दुनिया की लगभग 10 प्रतिशत आबादी इस रोग से प्रभावित है। अपने देश में 14 से 65 वर्ष की उम्र के बीच के 5 में से एक पुरुष और 4 में से 1 महिला इस रोग से प्रभावित हैं। समय के साथ यह संख्या बढ़ती जा रही है। जीर्ण गुर्दा रोग मुख्यतः मधुमेह, उच्च रक्तचाप, बाधित मूत्र प्रवाह, कुछ विषैले पदार्थ, कुछ दवाईयां, चोट आदि के कारण होता है। जीर्ण गुर्दा रोग का वर्तमान समय में कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है।

हालांकि आधुनिक चिकित्सा पद्धति द्वारा इसके कारणों को नियमित करके गुर्दों के नुकसान को बढ़ने से रोकने में कुछ मदद मिलती है लेकिन, वह पर्याप्त नहीं होते हैं। रोग के अंतिम चरण में रोगी के गुर्दे अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाते हैं। ऐसी स्थिति में रोगी को डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। यह काफी खर्चीला होता है। रोगी या उसके परिवार पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डाल देता है। अधिकतर रोगियों में इस खर्चे को उठाने की क्षमता भी नहीं हो पाती है। 

इन सभी कारणों से आज पूरी दुनिया आयुर्वेद की तरफ देख रही है। आयुर्वेद में वर्णित विभिन्न जड़ी-बूटियां इस घातक रोग का उपचार करने में सक्षम हैं। साथ ही साथ इसके द्वारा बहुत ही कम खर्चे में रोगी का उपचार संभव है। पुनर्नवा, वरुणा, मकोय, कासनी, शिरीष, धनिया, पपीता आदि विभिन्न जड़ी-बूटियां आयुर्वेद में हजारों सालों से वर्णित हैं। आज के वैज्ञानिक रिसर्च भी इस प्रभाव को सत्यापित करती है कि इनके उपयोग से गुर्दे रोगियों को उत्तम लाभ प्रदान किया जा सकता है।

विभिन्न परीक्षणों में पाया गया है कि इनके नियमित प्रयोग के द्वारा गुर्दों की कोशिकाओं की मरम्मत की जा सकती है। उसे खराब होने से बचाया जा सकता है। कोशिकाओं को ताकतवर बनाकर गुर्दों की कार्य क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है। इन जड़ी-बूटियों में विशिष्ट पोषक तत्व एवं एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और गुर्दा रोगियों को अत्यंत लाभ पहुंचाते हैं। रक्त में बढ़ रहे यूरिया एवं क्रिएटिनिन के स्तर को भी घटाते हैं और डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता को खत्म या कम करने में सहायक हैं। 

भारत की एक अग्रणी दवा निर्माता कंपनी एमिल फार्मास्युटिकल्स ने भी इन जड़ी-बूटियों का एक विशिष्ट मिश्रण तैयार किया है। इस दवा का नाम नीरी केएफटी है। देश के विभिन्न आयुर्वेद संस्थानों, आधुनिक चिकित्सकों, आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सकों के द्वारा गुर्दा रोगियों को देकर इसके द्वारा लाभ पहुंचाया जा रहा है। यह रक्त में यूरिया, क्रिएटिनिन, प्रोटीन की मात्रा को नियंत्रित करता है एवं हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है। गुर्दा के रोगियों को तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेनी चाहिए और तदनुसार इलाज कराना चाहिए।

                                                                                                                                                                                                                        डॉ. नितिका कोहली