इस समय कभी नहीं पीना चाहिए पानी, जहर की तरह करता है काम

नई दिल्ली: हमें अपने जीवन में क्या करना है, कैसे जीना है, जीवन में कैसे स्वस्थ्य रहना है, इन सब सवालों के जवाब आज नहीं कई वर्ष पहले ही हमारे ग्रंथों में लिख दिए गए थे। लेकिन इन सब बातों के हम भूलते जा रहे हैं।  जीवन दर्शन के ज्ञाता चाणक्य की नीतियों के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपनी जिंदगी में उनकी नीतियों का पालन करता है उसे कभी भी धोखा नहीं मिलता है। 

वैसे तो एक स्वस्थ शरीर के लिए दिन में 7 से 8 ग्लास पानी का सेवन करना चाहिए, लेकिन चाणक्य ने एक श्लोक के माध्यम से बताना चाहा है कि दिन में किस समय पानी पीना उचित है और किस वक्त पानी का सेवन जहर के समान है। आइए हम आपको बताते हैं कि दिन में किस समय पानी पीने से इंसान को बचना चाहिए और क्यों?

 चाणक्य कहते हैं कि

अर्जीणे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम्।

भोजने भोजने चामृतं वारि भोजनान्ते विषप्रदम्।।

चाणक्य नीति के आठवें अध्याय के सातवें श्लोक में इस बात का वर्णन किया गया है कि भोजन करने के तुरंतबाद पानी पीने से बचना चाहिए। इस दौरान जो पानी का सेवन करता है वह विष पान करने के समान होता है। इसमें ऐसा बताया गया है कि खाना पचने के बाद ही पानी का सेवन करना उत्तम है। इसका मतलब यह है कि खाना खाने के 1 से 2 घंटे के बाद ही पानी पीने से वह शरीर के लिए अच्छा माना जाता है।

खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने से भोजन को पचने में परेशानी होती है जिससे आगे चलकर इंसान को पेट से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। खाना पूरी तरह से पचने के बाद ही पानी का सेवन अमृत के समान होता है। इससे शरीर को शक्ति मिलती है और पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है।

जो व्यक्ति इस नीति का पालन करता है वह आजीवन स्वस्थ बना रहता है और किसी प्रकार की समस्या का सामना उसे नहीं करना पड़ता है।