मौत के डर की वजह से होती है बोतलबंद पानी की बिक्री!

नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम आ गया है अब लोग अधिकतर बोतलबंद पानी पानी ही पीना पसंद करेंगे लेकिन कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू में हुए एक शोध से पता चला है कि बोतलबंद पानी का अधिकतर प्रचार इंसान के मनोवैज्ञानिक संवेदनशीलता को गहराई से निशाना बनाता है।

यह उन्हें किसी ख़ास उत्पाद को खरीदने और उसके इस्तेमाल के लिए बाध्य करता है। वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए सोशल साइकोलॉजी टेरर मैनेजमेंट थ्योरी का इस्तेमाल किया, जिससे पता चला कि इंसान केवल मौत के डर से बोतलबंद पानी खरीदता है।

यह शोध करने वाले स्टीफन कोट ने कहा कि बोतलबंद पानी के प्रचारक हमारे सबसे बड़े भय के साथ दो अहम तरीकों से खेलते हैं। उन्होंने कहा कि मरने का भय हमें खतरे में पड़ने से रोकता है। कुछ लोगों को बोतलबंद पानी सुरक्षित और शुद्ध लगता है। क्योंकि अवचेतन में न मरने की इच्छा गहरे से समाई होती है।

रिसर्च में कुछ लोगों ने ये भी कहा कि नल का पानी पीने की ओर झुकाव बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए नई रणनीती बनाने की जरूरत है। लोगों के दिमाग में आज भी नल के पानी का इस्तेमाल ज्यादा सही है लेकिन उन्हें बोतल का पानी बेचने वाली कंपनियों ने प्रचार के जरिए इतना डराया है कि वो नल का पानी पीने से डरते हैं।

स्टडी में कहा गया है कि जब हमें नल के जरिए अच्छी गुणवत्ता का पानी उपलब्ध है तब भी हम बोतलबंद पानी की तरफ आकर्षित होते हैं तो सिर्फ इसलिए कि विज्ञापन के जरिए यह स्थापित कर दिया गया है कि बोतलबंद पानी ही शुद्ध है। इस तरह विज्ञापन एक बड़े जनसमूह तक पहुंचे हैं जिनमें ऐसे उपभोक्ता भी शामिल हैं जो स्वास्थ्य, शोहरत, दिखावे और पर्यावरण को तवज्जो देते हैं।