लॉकडाउन के दौरान पांच फीसद से ज्यादा महिलाओं ने प्रसव के बाद लगवाई  PPIUCD

गाजियाबादः लॉकडाउन के बाद परिवार नियोजन कार्यक्रम को लेकर शासन गंभीर हो गया है लॉकडाउन की बात करें तो इस दौरान गाजियाबाद जिले में कुल साढ़े पांच फीसद महिलाओं ने प्रसव के बाद पीपीआईयूसीडी लगवाई जबकि फिरोजाबाद 33 फीसद से अधिक परिणाम के साथ रहा टॉप पर रहा। फिलहाल नसबंदी को छोड़कर परिवार नियोजन से जुड़ी सभीसेवाएं सरकारी अस्पतालों  में पुनः शुरू हो गई हैं। कोविड-19 की डयूटी में लगी आशा और एएनएम घर-घर जाकर परिवार नियोजन के साधन जैसे कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों का वितरण कर रही हैं। साथ ही इस  दौरान परिवार नियोजन को लेकर काउंसलिंग भी की जा रही है। 

 मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. एनके गुप्ता ने  बताया परिवार नियोजन कार्यक्रम को पूरी गंभीरता से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया लॉकडाउन के दौरान अप्रैल और मई माह में (12 जून तक) जनपद में कुल 5860 संस्थागत प्रसव हुए हैं प्रसव के बाद कुल 322 महिलाओं को पीपीआईयूसीडी लगाई गई है। यह कुल संस्थागत प्रसवों का कुल 5.49 फीसदी है। इस दरमियान सबसे ज्यादा पीपीआईयूसीडी फिरोजाबाद जनपद में कुल 956 लगवाई गईं, जो जनपद में हुए संस्थागत प्रसवों को 33 फीसदी से अधिक था। पूरे सूबे की बात करें तो 27198 पीपीआईयूसी इन दो माह के दौरान लगाई गईं जो कुल संस्थागत प्रसवों का 9.62 फीसदी रहा। लॉकडाउन के दौरान परिवार नियोजन की सभी सुविधाएं रोक दी गई थीं, यह आंकड़ा केवल उन महिलाओं का है जिन्होंने प्रसव के दौरान पीपीआईयूसीडी लगवाईं फिलहाल नसबंदी को छोड़कर सभी सुविधाएं गाइडलाइन के साथ पुनः बहाल कर दी गई हैं। 

क्या है पीपीआईयूसीडी ?

पोस्टपार्टम इंट्रायूटाराइन कांट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपीआईयूसीडी)। यह उस गर्भ निरोधक विधि का नाम है। जिसके जरिए बच्चों में सुरक्षित अंतर रखने में मदद मिलती है। प्रसव के तुरंत बाद अपनाई जाने वाली यह विधि सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपलब्ध है। प्रसव के बाद अस्पताल से छ़ुट्टी मिलने से पहले ही यह डिवाइस लगवाई जा सकती है। इसके अलावा माहवारी या गर्भपात के बाद भी डाक्टर की सलाह से इसे लगवाया जा सकता है। एक बार लगवाने के बाद  इसका असर पांच से दस वर्षों तक रहता है। यह बच्चों में अंतर रखने की लंबी अवधि की एक विधि है। इसमें गर्भाशय में एक छोटा उपकरण लगाया जाता है। यह दो प्रकार के होते हैं। कॉपर आईयूसीडी 380ए,  इसका  असर दस वर्षों तक रहता है। दूसरी कॉपर  आईयूसीडी 375 इसका असर पांच वर्षों तक रहता है। ध्यान रहे, केवल प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा ही एक छोटी सी जांच के बाद इसे लगवाया जा सकता है। जब भी दंपत्ति बच्चा चाहें, अस्पताल जाकर इसे निकलवा सकते हैं।