तब्लीगी जमात की तालिबानी साजिश

भारत इस वक्त मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण ने इंसानी अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया है। भारत इस लड़ाई को बेहद मुस्तैदी से लड़ रहा है। सरकार की तरफ से उठाए गए कदम की विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सराहना की है। प्रधानमंत्री मोदी अबतक तीन बार देश की जनता के नाम संदेश प्रसारित कर चुके हैं। पीएम देश के डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कोरोना से लड़ने की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं और आवश्यक सलाह भी दे रहे हैं। लेकिन चुनौती तो तब बन गई है जब लॉकडाउन के बाद भी वायरस का संक्रमण नहीं थम रहा। दुनिया भर के 200 से अधिक देश इस महामारी की जद में हैं।

दुनिया भर में 10 लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। अबतक 53 हजार से अधिक मौत हो चुकी है। भारत में भी संक्रमितों और मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। कोराना संक्रमण से बचाने उतरे 52 डाक्टरों और मेडिकल स्टाफ को भी संक्रमण हो चुका है। इसके बाद भी कुछ लोगों की वजह से देश में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। तब्लीगी जमात की हरकतों से पूरा देश शर्मसार है। सरकार के सामने ऐसे राष्ट्र विरोधी तालिबानी सोच के लोग चुनौती बने हैं। सरकार एक नहीं कई मार्चों पर लड़ रही है। यह वक्त राजनीति का नहीं है। हमें धर्म, संप्रदाय, भाषा, नस्ल से आगे निकलकर देश के लिए सोचना होगा। जीवन बचेगा तो सभ्यताएं और संस्कृतियां बचेंगी। यह देश सभी धर्मों और संप्रदायों का है, फिर इसे हिंदू और मुसलमान के चश्मे से देखना कितनी बड़ी साजिश है।

भारत के लिए कोरोना वायरस से लड़ना आसान नहीं है लेकिन सरकार इसे चुनौती मानकर हर प्रयास कर रही है। राज्य सरकारें बहुमूल्य जीवन बचाने के लिए पूरी तरह प्रयासरत हैं। मेडिकल स्टाफ, पुलिस, साहित्यकार, संगीतकार, अभिनेता, राजनेता और मीडिया सभी एक साथ हैं। यह आलोचना का समय नहीं, एकजुटता का है। दिन-रात स्वयंसेवियों की फौज भूखे लोगों को भोजन उपलब्ध करा रही है। जीवन बचाने के लिए सघर्ष चल रहा है। कोरोना से प्रभावित चीन में भारतीय लोग सोशल मीडिया पर चीन सरकार के अनुभवों को साझा कर रहे हैं। लोगों को इस वायरस से बचने की सलाह दे रहे हैं। भारत की जनता से अपील भी कर रहे हैं कि आप सरकार के साथ खड़े हों और उसके दिशा-निर्देशों का पालन करें। लॉकडाउन की वजह से पूरा देश ठहरा हुआ है।

फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद है। कामगार पलायन कर चुके हैं। लोग घरों में कैद हैं। देश को बड़ी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। हजारों अरब डॉलर का प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। शेयर बाजार हर रोज डूब रहा है। विश्व बैंक ने कोरोना की लड़ाई जीतने के लिए भारत सरकार को बड़ी राहत देने की घोषणा की है। हजारों की संख्या में दानवीर प्रधानमंत्री केयर फंड में दान कर रहे हैं। लेकिन हमारे बीच के लोग ही सराकर के साथ हिंदू-मुस्लिम का घिनौना खेल खेल रहे हैं। नमाज अदा करने के बहाने इस्लाम को बदनाम किया जा रहा है। इस लड़ाई को देखते हुए सभी हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाइयों से संबंधित धर्मस्थलों पर ताला लटका है। उस स्थिति में दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज में तब्लीगी जमात की हरकत शर्मसार करने वाली है।

भारत में कुछ लोग इस्लाम को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उसमें तब्लीगी और दूसरे मौलवी शामिल हैं। देशभर में तब्लीगी जमात के संपर्क में आए 9000 हजार लोगों को क्वारंटीन में रखा गया है जबकि 400 लोगों में संक्रमण पाया गया है। अब इससे बड़ी शर्म की बात क्या हो सकती है। तब्लीगी जमात इस्लाम की आड़ में भारत के खिलाफ बड़ी साजिश रचने में कामयाब हुआ। जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण फैला है, उस स्थिति में सबकुछ जानते हुए भी दिल्ली में हजारों लोग मरकज में कैसे जमा हुए। इसके लिए कौन गुनहगार है। सरकारें भी अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से नहीं बच सकती। सरकार का खुफिया विभाग फेल रहा है। ऐसी स्थिति में इतनी भारी तादाद में विदेशी कैसे पहुंच गए। उससे भी बड़ी बात यह है कि लॉकडाउन के बाद भी 960 विदेशी पूरे भारत भर में टूरिस्ट वीजा की आड़ में फैल गए। 22 राज्यों के लोग इस जमात में शामिल हुए थे। आज हालत यह है कि तब्लीगी जमात ने भारत को कोरोना हब बनाने की साजिश रची है। इतनी भारी संख्या में विदेशी भारत के बड़े-छोड़े शहरों में फैल गए लेकिन हमारी सरकारों और खुफिया एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी। इसके अलावा धर्म की आड़ में हजारों की भीड़ मस्जिदों में इकट्ठा कर कोरोना का वायरस खैरात में बांटा। निश्चित रूप से कहीं न कहीं से यह हमारी व्यवस्थागत नाकामी है।

तब्लीगी जमात के लोग सोची-समझी रणनीति के तहत घृणित हरकत कर रहे हैं। यह सब तालिबानी सोच का हिस्सा है। जमात की हरकतों से इस्लाम बदनाम हो रहा है। जमात की हरकत से पूरे देश में थू-थू हो रही है। इंदौर में जांच करने गई डाक्टरों की टीम पर जमात के लोगों ने हमला बोला। जिसके बाद एनएसए लगाने के बाद सभी को जेल भेज दिया गया। नोएडा में क्वारंटीन किए गए जमात के लोगों ने नर्सों के साथ अश्लील हरकत की। बीड़ी, सिगरेट की मांग की गई। बगैर कपड़े के लोग घूमते रहे। जिसके बाद राज्य की योगी सरकार ने सभी छह जामातियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई का आदेश दिया। जमातियों को दूसरी जगह ले जाया गया है। महिला नर्सों को जामातियों से अलग कर दिया गया है। इसके अलावा नोएडा और अलीगढ़, भदोही में नमाज अदा करने की लिए भीड़ जुटाई गई। बिहार के मुंगेर में भी पुलिस टीम पर हमला हुआ। क्या यह धर्म का हिस्सा कहा जा सकता है। यह बेहद शर्मनाक हरकत है।

देश के लोगों की अगर यही सोच रही तो कोरोना की लड़ाई जीतना आसान नहीं होगा। मेडिकल स्टाफ, पुलिस और मीडिया के साथ बदसलूकी बेहूदा हरकत होगी। हालांकि केंद्र सरकार ने इसपर सख्त कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने जमात से संबंधित 960 लोगों का वीजा खत्म कर दिया है। लॉकडाउन तोड़ने वालों को जेल भेजने का आदेश दिया गया है। निश्चित रूप से सरकार का यह बड़ा फैसला है। हम सरकारों को गाली देकर समस्या का समाधान नहीं निकाल सकते हैं। यह समय देश के साथ खड़े होने का है। टिप्पणी या आलोचना के बजाय हम सरकार का साथ दें और कोरोना की जंग में एक सच्चे राष्ट्रवादी की तरह अपना दायित्व निभाएं।

प्रभुनाथ शुक्ल